मोहब्बत की बात
1. किसी का हाथ थामकर चलता हूँ!
उसे अपना मानकर चलता हूँ!
बिलायस यही बात जानकर चलता हूँ!
पी लिए दो जाम उल्फ़त के मैंने!2
मानके शिक़स्त शरहद लाँघकर चलता हूँ!
ख़ुश्नुमा हुश्न इख़्तिताम हैं फ़ासले!2
मुराद मुक़म्मल हो दिल थामकर चलता हूँ!
मानकर हर शेय को फ़ना दिल से!2
चाहत में तेरी महल शमशान कर चलता हूँ!
पड़ी है फ़ितरत मै क़दों की मुझे!2
खा कर ग़म तुझ पे ऐहसान कर चलता हूँ!
मुख़्तलिफ़ नहीं हूँ मरके मैं कभी!2
यादग़ार दुनियाँ में फ़रमान कर चलता हूँ!
क़ायम है हौसला दिल में सनम!2
पाने झलक दिल अरमान कर चलता हूँ!
तेरे हुस्न का इमाम हो गया हूँ मैं!2
अन्जुम की एवज महताब कर चलता हूँ!
ख़त्म कर दूरियाँ आग़ोश में मेरी!2
अपनाने तुझे प्यार परवान कर चलता हूँ!
2. मोहब्बत की बात हो गई!
तुझ पर इल्तिफ़ात हो गई!
अपना पन मेहसूस होता है देखकर तुझे
सुकून के लिए बा वस्ता नग़मात हो गई!
एक बार देखा था जिसको कभी!2
पहली मर्तवा उससे मुलाक़ात हो गई!
आया नहीं है नज़दीक वो अभी!2
शाम ढलकर मिलन की रात हो गई!
दिल मेरा वीरान है उसके लिए!2
क्या उसकी पहचान वाहियात हो गई!
नज़र का जाम पिला दिया उसने!2
दिल तोड़ कर मेरा बदज़ात हो गई!
ग़ुजरकर हदों से मुनब्बर जहाँ में!2
पाने की तुझको मुझे ऐहतियात हो गई!
आया है ज़िन्दग़ी में बनके ख़ुश्नुमा!2
फ़ूल खिल गए दिल में निज़ात मिल गई!
डिनर का शुक़ून3.हाथों में हाथ डालकर होटल में चल दिए
करके डिनर शुक़ून से बोतल में दम लिए!
करते हैं बात प्यार की चाहत का आशियाँ
बाहों में बाहें डालकर आँखों में नम लिए!
कोई लुटा है इश्क़ में आपस की दूरियाँ!2
तन्हाई दिल को मारकर बैठी है घर किए!
दुशमन बना ज़हान है दे करके नफ़रतें!2
चादर ग़मों की ओढ़के हल्चल में चल दिए!
पहली दफ़ा जो प्यार में दिल को शुक़ून था!2
ख़ातिर तेरे जिहाद में अपनों से लड़ दिए!
आती है रोज़ ख़ाब में मुझको ही तू नज़र!2
यादों को शाक़ी मानके शिद्दत में पल जिए!
तेरा ही इल्म याद है दिल तुझको चाहता!2
मज़बूर होके इश्क़ की दलदल में छल दिए!
तुझको ही दिल कुबूलता हर हाल में सनम!2
दिल की लगी के हादशे मुश्क़िल में ग़म पिए!
तुझको दिल से मोहब्बत करते हैं हम
चाहा है तुझको दिल ने सनम!
कोई नहीं है जहाँ में मेरा
तेरी यादों में पल पल बिख़रते हैं हम!
ज़ुल्फें जो उड़तीं हवा में तेरी!
मेहताब मानिन्द नज़रें तेरी!
नाँ शाद मौसम है वीरान दिल
ऐसी लहरों से हरपल निकलते हैं हम!
तन्हा है जीवन गुजारा नहीं!
कोई जहाँ में हमारा नहीं!
मेरी जाने तमन्ना बाहों में आ
तेरी यादों में अक्सर सिसकते हैं हम!
छोड़ा मेरा साथ नाराजग़ी!
हमको मयस्सर है आवारग़ी!
इज़हार वस्ले मैं बेताब हूँ
तुझको पाने की हसरत करते हैं हम!
लम्हात यादों में आते गए!
पत्थर जमाने में खाते गए!
मरशिम शदीदे मेरी ज़िन्दग़ी
इश्म दुनियाँ में तौहमत सहते हैं हम!
करने को तुझसे मैं तुझमें प्यार देखता हूँ
पयामे मोहब्बत का ये ऐतवार देखता हूँ
दामन छोड़ने को दिल नहीं चाहता मेरा
नूर से हूर एक अलवेली सरकार देखता हूँ
क़यामत के दौर में ज़िहाद की है हमने
ज़िन्दगी भी अपनी बरबाद की है हमने
आतिश के दरियाव में खुद ही जल गए
साहिल नहीं मजधार में पतवार देखता हूँ
मौजें भी मेहरूम हैं ज़िंदग़ी में लाने को
हिज्र में हसरत हो गई है बंदगी पाने को
भटकता हूँ दर दर तेरे दीदार के लिए मैं
सरग़म के साज़ में तेरी झन्क़ार देखता हूँ
आँखों में आँसू आ गए हैं ख़याल में तेरे
पागल सा हो गया हूँ मैं मलाल में तेरे
हर पल ये हयात वीरान सा लगता है मुझे
बहरहाल में खुद को भी दुश्वार देखता हूँ
मेहरूम नँ होना तू मेरी गुरवत के वास्ते
चल पड़ा हूँ मैं तेरी मोहब्बत के रास्ते
उलझता रहा मैं ज़माने की जिहादों में
तसब्बुर तहरीक़ से सौ बार देखता हूँ
मानवता एक हयात का आधार है!
हर मानुष को उसका अधिकार है!
नहीं टिकी है फ़ैसलों पर मानवता!
टिकी इरादों पर है उसकी तत्परता!
बुलंद इरादा हयात में उसका होगा!
क़दम जिसका समाज में पहला होगा!
क़दम मुस्तैद पहलू की ओर बढ़ाना है!
मानवता के लिए हमें सर भी कटाना है!
दुनियाँ का दस्तूर बे नक़ाब हो गया है!
मतलब के बजाय जबाव हो गया है!
उल्फ़त की कसौटी जहाँ में थम गई है!
टूट पड़ा है सितम मज़म्मत जम गई है!
उभारने के लिए क़ाविश करनी पड़गी!
सहायक बनकर गागर भरनी पड़गी!
मोहब्बत है मानवता का बाजार में!
करले इब्तिदा ख़ुद इसके आभार में!
किसी से आँख से आँख लड़ने लगी है!
उसकी सूरत अब दिल में बसने लगी है!
चढ़ गया है ज़हर तेरे हुस्न का दिल पर!2
नागिन की तरह वो मुझे डसने लगी है!
उसके ज़हर से ज़हरीला हो गया हूँ मैं!2
मेरे कान में आकर वो कुछ कहने लगी है!
हँसने लगे हैं मेहरम मेरी आवारगी पर!2
होकर परेशान मेरी आँख भरने लगी है!
बदन मेरा इश्क़ में मलीन हो गया है अब!2
हर बार तेरी सूरत दिल में उतरने लगी है!
क़ामयाब होना चाहता हूँ तेरी दुआओं से!2
अब ज़माने की हर बात खटकने लगी है!
मुरझा गया हूँ तेरे इन्तज़ार में मुक़म्मल!2
जवानी अब तो दिन व दिन ढलने लगी है!
घर जलाकर राख कर दिया तेरे फ़ितूर में!2
ख़ुद राख होने की आतिश जलने लगी है!
करवटें बदलने से क़रार नहीं मिलता,
किसी को मेहसूस करने से प्यार नहीं मिलता,
हिज्र की घड़ी में जीना भी दुष्वार हो जाता है,
इश्क़ को निभाने के लिए तलबग़ार नहीं मिलता,
झुकी है मेरी नज़र अधूरे पन में अब तो यार,
बार बार देखा था जिसको वो एक बार नहीं मिलता,
वीरान ग़लियाँ हो गई हैं राहग़ीरों की अब तो,
खिड़कियों से झाँकने पर भी मुझे प्यार नहीं मिलता,
हुस्न की क़ैद में दाख़िल हो गया हूँ मैं अदब से,
नफ़रतें मिली हैं बहुत लेकिन इज़हार नहीं मिलता,
नाम लिखकर हथेली पे इख़्तिताम कर डाला,
क्योंकि काटों के बजाय दिल में फूल नहीं खिलता,
गलियों के चक्कर अभी कम नहीं हैं जानेमन,
मगर करने को कभी अब मुझे इक़रार नहीं मिलता,
उझकता हूँ खिड़कियों से रात दिन तुझको मैं,
बहलाने के लिए दिल को सब्रे क़रार नहीं मिलता,
मिलते हैं दुनियाँ में अफ़साने बहुत से मुझको,
लेकिन तुझ जैसा कहीं ख़ूब दिलदार नहीं मिलता,
तन्हाई का मेला है!
हँस हँस करके झेला है!
नहीं जहाँ स्वीकारता
बेज़र इश्क़ अकेला है!
नहीं दिले अब शाद हो!
जीवन भी बरबाद हो!
ग़ुमनामी दस्तूर का
दर्द भरा ये रेला है!
तन्हाई का मेला है!
दिले अधूरा ख़्वाब है!
तन्हा बाद विवाद है!
नहीं मिला है प्यार भी
दुश्मन होइ झमेला है!
तन्हाई का मेला है!
प्यारी कहाँ तू चली गई!
मुरझा जिगर कली गई!
तड़फ तड़फके जी रहा
सुनकर सबका हेला है!
तन्हाई का मेला है!
हालाते दिल ठीक था!
तू मेरे नज़दीक था!
वक्त गुज़ारा साथ में
बसता यादों खेला है!
तन्हाई का मेला है!
1 ज़ियारत करने से शिफ़ा मिलती है
बेहसत करने से सज़ा मिलती है
करले कुबूल बन्दग़ी इश्क़ के बाजार में
ख़िदमत करने से किसी की दुआ मिलती है!
2 आजाओ इक बार दिल मचलता है मेरा
आने की उम्मीद में यौवन ढलता है मेरा
कहाँ तक सब्र करूँ तन्हाई शही नहीं जाती
इन्तज़ार में तेरे नाज़ुक़ वदन जलता है मेरा!
3 इश्क़ का लैहजा सीखले इशारों से
नज़ारत करना सीखले नज़ारों से
क़ुदरत ने दिया है इन्सान को यही सबक़
हिक़मत करना सीखले बहारों से!
4 करता हूँ गलियों की ज़ियारत
ग़मगीन है दिल की हालत
मुझे अब शिक़वा नहीं है तुझसे कोई
मिल गई ख़ाक में मेरी चाहत!
5 किसी से नज़र मिल गई
कली दिल की खिल गई
मुझे कुछ नहीं चाहिए तेरे सिवा
रूह तेरे बिन मेरी हिल गई!
6 साथ निभाने वाले साथ छोड़ते नहीं
अपने मेहबूब से मुख मोड़ते नहीं
होना पड़े बेज़ार ग़र लव ज़िहाद में
किसी ग़ैर से नाता कभी जोड़ते नहीं!
7 आशिक़ प्यार करते हैं
ज़िन्दग़ी बरबाद करते हैं
दर बदर घूँमना समझा हैं मुनासिब
ज़माने से लव ज़िहाद करते हैं!
8 आशिक़ी का रँग नहीं आया
दिलवर मेरे सँग नहीं आया
रचाई मेहन्दी किसी ग़ैर के लिए उसने
प्यार करने का ढँग नहीं आया!
9 जीने की आश नहीं है
तू मेरे पास नहीं है
हयात दुश्वार है मेरे लिए
और किसी की तलाश नहीं है!
10 तेरा चेहरा मेरे दिल की जान बन गया
एक हँसी मुलाक़ात की शान बन गया
इन्तजार में तेरे ज़िहाद करते हैं हर पल
आने वाले कल के लिये शमशान बन गया!
11 मारने लगा मौज यौवन तेरा मेरे दिल में
हो गया हुस्न की आबरू जान है मुश्किल में,
तौफ़ीक दिल में बाँधता रहा ख़ुदा के नाम पर
शिक़स्त हाथों में फिर मिली आने वाले ही पल में!
12 किसी को दिल देने से बे वफ़ाई होती है
इश्क़ में ज़िहाद करने से रुषवाई होती है
कैसे नँ जायें फिर कड़े इन्तिहाँन में हम
जिसको पाकर ज़माने से तन्हाई होती है!
13 अफ़साना बन गया है जुदाई में मेरा
टूटा है दिल शादिर तन्हाई में मेरा
वैद्य का मरहम नहीं कर सकता अब ठीक
मचले है दिल बजती शेहनाई में मेरा!
14 आतिशे दिल का फ़साना कहा नहीं जाता
कहाँ तक सब्र करें यार शुकून नहीं आता
बेहका दिया तुमने हमको मोहब्बत में कई बार
छोड़ दामन को आपके समाया गै़र नहीं जाता!
15 आप हमारी तरफ़ चले आए
दिल जलों की तरह चले आए
ठोकरें खा कर इश्क़ में ग़म की
हादशे में बनकर क़हर चले आए!
16 ज़ख़्म अभी भरा नहीं
हादशाें से कभी डरा नहीं
फ़ितरत हो गई है ज़िहाद की
ज़िन्दा हूँ मैं अभी मरा नहीं!
17 दिल को छू गई किसी की याद
अभी तक दफ़्न है उसकी फ़रियाद
ग़मग़ीन दिल को भी सम्हाला ऐहतियात से
हाँसिल करने को अवाम हो रही ज़िहाद!
18 हिक़ायत में मैं अपना नाम देता हूँ
तुम्हारा किसी को पैग़ाम देता हूँ
आ गई है रवानी फ़िज़ाओं में अब
सौग़ाते मोहब्बत का एक जाम देता हूँ!
19 मेरी अल्ग़रज़ मोहब्बत में बीती है
किसी को दिल देने की तोहमत में बीती है
किसी ने भला कहा किसी ने बुरा कहा हमसे
ख़ुदा पर यक़ीन किया इसलिए सौहरत में बीती है!
20 तू दिल की एक आश बन गई
मेरी मोहब्बत की तलाश बन गई
झुके नहीं हम झुकाने से कभी
ज़िन्दग़ी बद हवाश बन गई!
21 आइने में दिलवर की तस्वीर देखता हूँ
अपनी बिगड़ी हुई तक़दीर देखता हूँ
मेहरूम हो गया है हमेशाँ के लिए वो
मुलाक़ात करने की तदबीर देखताहूँ!
22 इश्क़ में बद जवान होती है
एक झूठी शान होती है
लक्षणँ हैं बरवादियों के यही
अंत में ज़िन्दग़ी शमशान होती है!
23 इश्क़ मेरी तासीर है
ख़ुदा की दी हुई ताबीर है
ठुकराना नहीं इसको यार
अनमोल हीरा जाग़ीर है!
24 सनम को देने के लिए अभी जान बाकी है
मुकद्दर आजमाने लिए इन्तिहाँन बाकी है
मोहब्बत का लैहजा आ गया है मुझे अब
रिणँ चुकाने के लिए अभी शमशान बाकी है!
25 छलकता हुआ जाम हो
वो भी सुबहो शाम हो
हालात बदलते हैं मश्ती में
जब पास कोई गुल्फ़ाम हो!
26 मिलन की रात में नुमाइशें होती हैं
अपनी अपनी ख़्वाहिशें होती हैं
मिलते हैं दो दिल मरज़ी से मोहब्बत में
मुक़म्मल दिल की फ़रमाइशें होती हैं!
27 तेरी यादों में जीते हैं यार
आँशू मोहब्बत के पीते हैं यार
करने को सब्र अभी बाकी है दिल में
अभी दिन बहुत कम बीते हैं यार!
28 शुरू हुई है जब से कहानी
फ़िज़ाओं में आई है रवानी
मिलने को बेताव हूँ उससे
प्यार पर छाई है जवानी!
29 प्यार के दुश्मन प्यार नहीं करते
इश्क़ में कभी इज़हार नहीं करते
पत्थर होते हैं दिल जो पिघलते नहीं
गिरेवान की कभी दरक़ार नहीं करते!
30 ज़िहादों से जूझते रहेंगे
चारों तरफ़ घूमते रहेंगे
ज़माना कुछ भी कहे बेशक
मै क़दों में डूबते रहेंगे!
31 चूड़ी खनकती है हाथ में तेरे
हाथ है तेरा हाथ में मेरे
दमकता है झूमर शम्स की तरह
चलती है जब तू साथ में मेरे!
32 दर दर भटकते रहे कब से
याद भी तुझको करते रहे कब से
पड़ गई है आदत तेरे इन्तज़ार की अब
शिद्दत को मयस्सर करते रहे कब से!
33 मुक़म्मल हो गईं हैं हदें सारी रहा नहीं जाता
सदमा सह लिया बहुत अब सहा नहीं जाता
बिछड़कर जी रहे हैं आपकी चाहत में हम
बहुत कह दिया सनम अब कहा नहीं जाता!
34 हर घड़ी हर शय में नजर आऊँगा
एक दिन तेरे दिल में उतर जाऊँगा
ग़वारा कर या नँ कर तुझ पर मुक़म्मल है
तेरी गलियों से ग़ुज़र कर मैं किधर जाऊँगा!
35 अपने पन को अपना लीजिए
बुरी आदत को फ़ना कीजिए
जीवन की यही बुनियाद है प्यारे
दुश्मन को दोस्त बना लीजिए!
36 हम आपके पास बैठे हैं
फिर भी उदास बैठे हैं
करेैं तो और क्या करैं
ग़म बद हवास बैठे हैं!
37 दर्दे ग़म की दवा दे दे
मुझे सुबह की हवा दे दे!
मैं ठीक हो जाऊँ जानेमन
बस इतनी सी दुआ दे दे!
38 प्यार में रुष्वाई मिलती है
दर्द ए ग़म तन्हाई मिलती है
नहीं मिलता सब्र दिल को कभी
वफा के वजाय बेवफ़ाई मिलती है!
39 रो मत दिल तू बड़ा बावरा है
करले फ़कीर दिल ख़ुदा को तेरा
आसरा है
ग़नीमत होगी तेरे लिए बेहतर यही
समझ किसी के दिल का हर एक
माज़रा है!
40 तेरा दिल मेरे दिल में तब्दील हो
दो बूँद के लिए तरसता अतील हो
बुझेगी प्यास उम्र भर की अब तो
जनाब की कुर्सी पर बैठा वकील हो!

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